वाराणसी में विजयदशमी के बाद आयोजित होने वाला नाटी इमली का भारत मिलाप पूरे देश में अपनी अलग पहचान रखता है। इसे देखने के लिए न सिर्फ़ काशीवासी बल्कि देशभर से लाखों श्रद्धालु हर साल उमड़ते हैं।
भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के भावनात्मक मिलन का यह क्षण भक्तों के लिए अत्यंत पावन और ऐतिहासिक माना जाता है।
बारिश में भी आस्था रही अडिग
इस बार आयोजन की सबसे बड़ी चुनौती लगातार हो रही भारी बारिश रही। सुबह से ही काशी में झमाझम बारिश होती रही, लेकिन श्रद्धालुओं के उत्साह और आस्था में कोई कमी नहीं आई।
लोग बारिश में भीगते हुए मैदान स्थल तक पहुँचे और सूर्यास्त के समय होने वाले इस दिव्य दृश्य का साक्षी बने।
धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक
श्रद्धालुओं का कहना था कि “भारत मिलाप की यह परंपरा केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है।”
इस आयोजन के दौरान काशी में उमड़े जनसैलाब ने यह साबित कर दिया कि बारिश जैसी बाधाएँ भी भक्ति और विश्वास के आगे टिक नहीं सकतीं।
लक्खा मेला का हिस्सा
विशेष बात यह है कि नाटी इमली का भारत मिलाप ‘लक्खा मेला’ में भी शुमार है।
लक्खा मेला उन आयोजनों को कहा जाता है जहाँ लाखों की संख्या में लोग एक साथ जुटते हैं। इस आयोजन के दौरान पूरा वाराणसी शहर भक्ति, उमंग और उत्साह से सराबोर हो जाता है।
परंपरा जो पीढ़ियों से जीवित है
भारत मिलाप सिर्फ़ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह काशी की सांस्कृतिक धरोहर है। यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चलती आ रही है और आज भी लोगों के दिलों में उतनी ही आस्था जगाती है जितनी सैकड़ों साल पहले जगाती थी।
