वाराणसी से खजुराहो के बीच नवंबर माह से वंदे भारत एक्सप्रेस की सेवा शुरू कर दी गई है। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और तीर्थ स्थानों के बीच तेज़ एवं आधुनिक यात्रा सुविधा देने के उद्देश्य से यह ट्रेन महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि शुरुआती दिनों में यात्रियों की संख्या उम्मीद से कम दिखाई दे रही है।
530 सीटों वाली ट्रेन में पहले दिन केवल 126 यात्री
The Hindustan Press को प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस वंदे भारत एक्सप्रेस में कुल 530 सीटें उपलब्ध हैं, लेकिन पहले दिन मात्र 126 यात्रियों ने वाराणसी से खजुराहो के लिए सफर किया। यह ट्रेन सप्ताह में 6 दिन संचालित होगी और वाराणसी से चलते हुए प्रयागराज, चित्रकूट होते हुए खजुराहो पहुंचेगी।
रेलवे का कहना है कि नई ट्रेनों में शुरुआती दिनों में यात्रियों की संख्या कम होना सामान्य बात है, और आने वाले सप्ताहों में इस रूट पर यात्रा करने वालों की संख्या में वृद्धि की संभावना है। धार्मिक स्थलों के लिए जाने वाले यात्री और कामकाजी लोग इस सेवा से काफी लाभ उठा सकते हैं।
प्रवासन और धार्मिक यात्राओं के लिए बड़ी सुविधा
वाराणसी और खजुराहो दोनों ही धार्मिक एवं पर्यटन दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण शहर हैं। अब तेज़ गति वाली वंदे भारत सेवा मिलने से यात्रियों को समय की बचत के साथ अधिक आरामदायक यात्रा अनुभव मिलेगा। रेलवे का अनुमान है कि जैसे-जैसे लोगों को इस नई ट्रेन सेवा की जानकारी मिलेगी, ट्रैफिक में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
पीएम मोदी ने दिखाई थी हरी झंडी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7–8 नवंबर को वाराणसी प्रवास के दौरान बनारस रेलवे स्टेशन से चार वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इन्हीं में से एक वाराणसी–खजुराहो वंदे भारत एक्सप्रेस भी शामिल है। लॉन्चिंग के बाद से यह ट्रेन यात्रियों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि आने वाले दिनों में इस रूट पर यात्रियों की संख्या में कितनी तेजी से बढ़ोतरी होती है और यह नई सेवा धार्मिक पर्यटन को किस स्तर तक बढ़ावा देती है।
