वाराणसी की हवा इन दिनों तेजी से जहरीली होती जा रही है। शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगातार खतरे के निशान को पार कर रहा है। 15 नवंबर को वाराणसी का AQI 524 रिकॉर्ड किया गया, जो साफ बताता है कि शहर की आबोहवा बेहद खराब स्तर पर पहुँच चुकी है। प्रदूषण पर रोकथाम के लिए अभी तक प्रशासन की ओर से कोई कड़ा कदम नहीं उठाया गया है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
AQI 500 के पार, हवा में दम घुटने जैसा माहौल
काशी को हमेशा देश के विकास मॉडल के रूप में देखा जाता है, लेकिन फिलहाल स्थिति बिल्कुल उलट है। शहर की आबोहवा इतनी खराब हो चुकी है कि सांस लेना तक मुश्किल हो गया है।
प्रदूषण नियंत्रण विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 15 नवंबर को वाराणसी का AQI “सीवियर कैटेगरी” में दर्ज हुआ, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत खतरनाक माना जाता है।
स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने कहा है कि काशी जैसी धार्मिक नगरी में हवा का इतना खराब होना बेहद चिंताजनक स्थिति है। इसके बावजूद प्रदूषण रोकने को लेकर प्रशासनिक सक्रियता नदारद है।
प्रदूषण बढ़ने के प्रमुख कारण
वाराणसी में प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं—
- वाहनों से निकलने वाला धुआँ
- फैक्ट्रियों और छोटे औद्योगिक इकाइयों का उत्सर्जन
- निर्माण और ध्वस्तीकरण का काम
- मौसम में लगातार हो रहा बदलाव
इन सबके चलते शहर की हवा में धूलकणों (PM 2.5 व PM 10) की मात्रा खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है।
स्वास्थ्य पर गंभीर असर
विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रदूषण का प्रभाव सिर्फ अस्थमा या सांस के मरीजों पर ही नहीं, बल्कि सामान्य लोगों पर भी पड़ रहा है।
लंबे समय तक ऐसे वातावरण में रहने से—
- आँखों में जलन
- गले में खराश
- सिरदर्द
- सांस लेने में दिक्कत
जैसी समस्याएँ आम होती जा रही हैं।
बाहर निकलते समय इन बातों का रखें ध्यान
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है:
- घर से बाहर निकलते समय N95 या अच्छा मास्क जरूर पहनें
- आँख व नाक को धूल से बचाएं
- सुबह-सुबह और देर शाम बाहर जाने से बचें
- किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें
इस समय वाराणसी की हवा बेहद गंभीर स्तर पर है और तत्काल कदम उठाना जरूरी है। लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही प्रदूषण नियंत्रण के लिए सख्त कदम उठाएगा।
