पिपरी नगर पंचायत में मालिकाना हक की जंग जनों में खौफ, विभागों की खींचतान, आखिर योगी जी कब होगी सुनवाई ?

अमित पाठक अपन अपनी से ✍️

सोनभद्र के पिपरी नगर पंचायत क्षेत्र में वर्षों पुरानी समस्या आज भी जस की तस खड़ी है । पिपरी नगर पंचायत का चुनाव लगभग सन 1995 से ही हो रहा है ।लेकिन स्थानीय जनता को आज तक अपने घरों–जमीन पर स्पष्ट मालिकाना हक नहीं मिल सका है। स्थिति यह है कि भूमि विवाद को लेकर कभी वन विभाग आगे आता है तो कभी सिंचाई विभाग और इस खींचतान के बीच सबसे ज्यादा परेशान आम गरीब परिवार हो रहे हैं।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, नगर पंचायत बनने के बाद भी न तो भूमि का निस्तारण हुआ, न ही मालिकाना अधिकारों का समाधान। उल्टा हालात इतने खराब हो गए हैं कि यहां की जनता हर दिन इस भय में जीवन जी रही है कि कहीं किसी दिन उनका घर खाली न करवा दिया जाए। लोगों का कहना है कि विभागीय अधिकारी मनमानी कर रहे हैं और कई बार रवैया ऐसा हो जाता है कि मानो प्रशासनिक शक्ति नहीं बल्कि दबंगई दिखाई जा रही हो।

प्रश्न यह उठता है कि मौजूदा सरकार और माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के रहते आखिर गरीब जनता ही परेशान क्यों है ? जब नगर पंचायत का दर्जा पहले ही मिल चुका है, तो अभी तक भूमि का अंतिम निस्तारण क्यों नहीं हुआ? विभागों के बीच तालमेल का अभाव जनता की जिंदगी में असुरक्षा बढ़ा रहा है।

पिपरी की जनता एक गुहार लगा रही है माननीय योगी जी आपसे ।

उनके घर–जमीन पर स्पष्ट मालिकाना हक दिया जाए।

वन विभाग और सिंचाई विभागों के बीच चल रही वर्षों पुरानी खींचतान को बंद कर सीधा समाधान निकाला जाए।
अधिकारियों की मनमानी पर रोक लगाई जाए, ताकि जनता भयमुक्त होकर जी सके।
यह मुद्दा सिर्फ जमीन का नहीं, लाखों सपनों और दर्जनों परिवारों की सुरक्षा का प्रश्न है। अब देखना यह है कि योगी सरकार इस गंभीर मामले पर कब प्रभावी कदम उठाती है और पिपरी नगर पंचायत के लोगों को राहत मिलती है या नहीं।

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